क्रिकेट की मुख्य जानकारी: क्रिकेट के प्रारूप, मैदान, पिच और क्रीज

क्रिकेट की मुख्य जानकारी: क्रिकेट का खेल इंग्लैंड का राष्ट्रीय खेल है। परन्तु आज यह विश्व के लगभग सभी देशो में विभिन्न आयु वर्ग के व्यक्तियों द्वारा केलहा जाता है। यह खेल दो टीमों के मध्य खेला जाता है। प्रत्येक टीम में 11-11 खिलाडी होते है। यह खेल सम्भावनाओ का खेल मन जाता है। क्योकि इसमें अंतिम गेंद तक यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता की कोण सी टीम विजयी होगी। क्रिकेट का खेल तीन मुख्य कौशलो से मिलकर बना होता है – बल्लेबाजी , गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण। इन सभी कौशलों का खेल में एकसमान महत्व है। इन तीनों कौशलों का प्रयोग करके ही क्रिकेट का खेल खेला जाता है।  आजकल यह खेल तीन रूपों में खेला जाता है -१। एकदिवसीय मैच, 2. टेस्ट मैच और 3. 20-20 क्रिकेट ।

एकदिवसीय मैच – क्रिकेट की मुख्य जानकारी

क्रिकेट मैच का पहला प्रारूप है – वन डे क्रिकेट मैच, अर्थात एकदिवसीय क्रिकेट मैच। इसकी ओवर सीमा पहले साठ ओवर हुआ करती थी, जब कि बाद में इसे बदलकर पचास ओवर कर दिया गया है।

टेस्ट मैच- क्रिकेट की मुख्य जानकारी

क्रिकेट मैच का दूसरा प्रारूप है – टेस्ट मैच। इसे पांच दिवसीय क्रिकेट मैच भी कहते है। इसमें लगातार 5 दिनों तक क्रिकेट खेला जाता है। इसकी ओवर सीमा नब्बे ओवर प्रतिदिन होती है और दोनों टीमें दो – दो बार बल्लेबाजी और गेंदबाजी करती है।

20-20 क्रिकेट

ये क्रिकेट का सबसे छोटा और तेज – तर्रार प्रारूप है। इस मैच में ओवर सीमा मात्र बीस ओवर की होती है। क्रिकेट के अन्य प्रकार – दुनिया भर में खेले जाने वाले इस खेल के असंख्य अनौपचारिक रूप है, जैसे – इनडोर क्रिकेट, फ़्रांसीसी क्रिकेट, बीच क्रिकेट, क्विक क्रिकेट और सभी प्रकार के कार्ड खेल तथा बोर्ड खेल, जो क्रिकेट से प्रेरित है। इन रूपों में अक्सर नियम बदल दिये जाते है, ताकि सीमित स्त्रोतों में खेल को खेलने योग्य बनाया जा सके या सहभागियों के लिए इसे अधिक मनोरंजक एवं आसान बनाया जा सके।

क्रिकेट मैदान

क्रिकेट का मैदान कई आकार और आकृतियों का हो सकता है। मैदान घास का होता है और इसे ग्राउण्डसमैन के द्वारा तैयार किया जाता है, जिसके कार्य में उवरण, कटाई , रोलिंग और सतह को समतल करना सम्मिलित होता है। मैदान का व्यास 140 -160 गज़ (130 -150 ) सामान्य होता है। मैदान की परिधि को सीमा कहा जाता है और ऐसे कभी- कभी रंग दिया जाता है या कभी -कभी एक रस्सी के द्वारा मैदान की बाहरी सीमा को चिन्हित किया जाता है। मैदान गोल, चौकोर या अण्डाकार सकता है।

धावल स्थल (पिच)

जिस क्षेत्र में दोनों टीमों के बल्लेबाज बल्लेबाजी करके अधिक – से – अधिक रन अर्जित करने का प्रयत्न करते है, उसे पिच या धावन स्थल कहा जाता है। इस क्षेत्र को अंकित करने के लिए इसके दोनों और विकेट स्थापित किये जाते है। इन दोनों विकटों के मध्य दूरी कम-से-कम 22 गज होनी चाहिए। मध्य विकेटों को जोड़ने के लिए एक काल्पनिक रेखा अंकित की जाती है और इनकी मदद से एक क्षेत्र बनाया जाता है जिसकी चौड़ाई 5 फुट होती है, जिसे पिच कहा जाता है।

क्रीज

पिच पर गेंदबाज़ी की क्रीज, बल्लेबाजी की क्रीज तथा दो रिटर्न क्रीजो को अंकित किया जाना चाहिए। इन्हें बनाने के लिए मैदान पर सफ़ेद रंग की रेखाएं चिन्हित की जानी चाहिए।

गेंदबाज़ी की क्रीज -स्टम्प के मध्य बाग़ में यह केंद्रित होगी। स्टम्प के केन्द्र से इसकी लम्बाई 8 फुट 8 इंच होनी चाहिए।

पोपिंग क्रीज – इस क्रीज को गेंदबाज़ी की क्रीज के समानान्तर अंकित किया जाना चाहिए और इनके मध्य की दूरी 4 फुट 1.22 मीटर होनी आवश्यक है। यह क्रीज इस प्रकार से चिन्हित की जानी चाहिए कि यह स्टम्प रेखा के पाशर्व बाग़ से 6 फुट की दूरी तक बढ़ती हो।

रिटर्न क्रीज – इस रेखा को विकेट के पीछे इस प्रकार से बनाया जाना चाहिए कि यह समकोण बनाये। विकेट तथा इस क्रीज के मध्य कम – से – कम 4 फुट 4 इंच की दूरी अवश्य होनी चाहिए।
उपरोक्त सभी क्रीजो को मिलाकर पिच का निर्माण होता है। खेल आरम्भ होने के बाद पिच को नही बदला जा सकता है। 9 वर्ष से कम आयु के खिलाड़ियों के लिए 18 गज के माप वाली पिच का प्रयोग किया जाना चाहिए। 11 वर्ष से कम आयु के खिलाड़ियों के लिए 21 गज वाली पिच का प्रयोग करना चाहिए तथा 13 वर्ष से कम आयु के खिलाड़ियों के लिए 21 गज माप वाली पिच का प्रयोग किया जाना चाहिए।

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