तैराकी के नियम, प्रमुख प्रकार, वेशभूषा के बारे में संपूर्ण जानकारी

तैराकी के नियम

तैराकी के नियम: तैराकी एक जलक्रीड़ा है। इसके अन्तर्ग़त अपने हाथ – पांव की मदद से पानी में गति करनी होती है। तैरने के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित है – 1. छाती के बल तैरना या ब्रेस्ट स्ट्रोक इसमें तैरने वाला छाती के बल पानी पर लेटकर निम्नलिखित क्रिया करता है – दोनों हाथ और पांव ढीले रखकर शरीर के नीचे मोड़ना। दोनों हाथों को मिलाकर सामने सीधे करना और साथ – साथ दोनों पांव भी घुटने के नीचे हिलाकर सीधे करना। सीधे पांव कैंची की भांति जोर से इकटठा करना। इसमें पानी जोर से पीछे कटेगा और बदन आगे जायेगा। दोनों हाथों से पानी को कन्धों की ओर जोर से दबाना। इससे मुँह पानी के ऊपर आयेगा और श्वास लेना सरल होगा। 2. पीठ के बल तैरना या बैंक स्ट्रोक इसमें तैरने वाला पानी पर चित लेटता है और उसका सिर थोड़ा उठा रहता है। तैराक को निम्ननिखित क्रिया करनी पड़ती है- दोनों हाथ मोड़कर कन्धे की ओर लेना और दोनों पांव ढीले रखकर समीप लेना। पानी में सिर के ऊपर हाथ सीधे करना और साथ – साथ घुटने के नीचे पांव हिलाकर सीधे करना। कैची की भांति पांव इकटठे करके दोनों हाथ वर्तुलाकार पानी में हिलाकर शरीर के समीप पानी को दबाते – दबाते लाना। इसी स्थिति में बदन को ढीला रखकर आगे बढ़ना। इस विधि में श्वसन के लिए कोई विशेष क्रिया नहीं करनी पड़ती है। 3. बैक क्रॉल इसमें हाथ की क्रिया दो प्रकार की होती है – दोनों हाथों को बदन के पास लाते हुए ढीले … Read more

वॉलीबॉल खेल की जानकारी: टीम, कप्तान और खेल का मैदान

वॉलीबॉल खेल की जानकारी

वॉलीबॉल खेल खेल दो टीमों के मध्य खेला जाता है। प्रत्येक टीम में 6  खिलाड़ी होते है। जाल खेल के मैदान को दो भागों में बाटता है। इसमें गेंद हाथ या बाजू के प्रहार से खेली जाती है। इस खेल में प्रत्येक टीम गेंद को विपक्षी के पाले में गिराने का प्रयत्न करती है तथा वह इस बात का भी ध्यान रखती है कि गेंद उनके पाले की भूमि को स्पर्श न करे। बाद की पंक्ति का दाया खिलाड़ी सर्विस द्वारा गेंद पर प्रहार कर विपक्षी के पाले में फेंकता है। गेंद पर प्रहार गेंद को रोकने की अवस्था के अतिरिक्त तीन बार हो सकता है, परन्तु कोई भी खिलाड़ी गेंद पर दो बार प्रहार नहीं कर सकता। जब तक गेंद किसी के पाले में नहीं गिरती अथवा पाले से बाहर नहीं गिरती, तब तक खेल जारी रहेगा। यदि सर्विस करने वाली टीम अंक जीतती है, तो उसका स्कोर बढ़ता है। यदि सर्विस प्राप्त करने वाली टीम अंक जीतती है, तो उसे सर्विस करने का अवसर मिलता है। यदि कोई टीम 15 अंक प्राप्त कर 2 अंको की बढ़त प्राप्त करती है, तो वह एक सैट जीत जाती है। तीन सैट जीतने पर टीम को विजयी घोषित कर दिया जाता है। यदि दोनों टीमों के मध्य टाई हो जाती है, अर्थात दोनों ही टीमें 16 – 16 अंक प्राप्त कर लेती है, तो 17वा अंक प्राप्त करने वाली टीम विजयी मानी जायेगी। यह भी देखे: टेबल टेनिस खेल की जानकारी: नियम, रैकेट, टेबल, जाल, गेंद वॉलीबॉल खेल का मैदान आयाम मैदान की … Read more

टेबल टेनिस खेल की जानकारी: नियम, रैकेट, टेबल, जाल, गेंद

टेबल टेनिस खेल

टेबल टेनिस खेल की शुरुवात इंग्लैण्ड में हुई। सन 1922 में इंग्लैण्ड में टेबल टेनिस एसोसिएशन बना तथा पहली विश्व प्रतियोगिता लन्दन में हुई। यह खेल में दो (एकल) या चार (युगल) खिलाड़ियों के मध्य खेला जाता है। यह खेल रैकेट और बॉल के साथ खेला जाता है। खेल का क्षेत्र एक लकड़ी की टेबल होती है। खिलाड़ियों के लिए यह आवश्यक है कि वह पांवो में रबड़ के जूते तथा रंगीन कपड़े पहनें। टेबल टेनिस खेल की टेबल टेबल टेनिस की टेबल का आकार आयताकार होता है। टेबल की लम्बाई 274 सेण्टीमीटर तथा चौड़ाई 152.5 सेण्टीमीटर होती है। टेबल की ऊपरी सतह जमीन से 76 सेण्टीमीटर ऊंची होंगी। टेबल किसी भी पदार्थ की बनी हो सकती है, परन्तु उसकी धरातल पर 30.5 सेण्टीमीटर की ऊंचाई कोई प्रमाणिक गेंद फेंकने पर एक सार टप्पा खायेगी, जो 22 सेण्टीमीटर से कम तथा 25 सेण्टीमीटर से अधिक ऊंचा नहीं होना चाहिए। टेबल के ऊपरी भाग को क्रीड़ा – तल कहा जाता है, जो किसी भी गहरे रंग का हो सकता है। इसके प्रत्येक किनारे पर 2 सेण्टीमीटर चौड़ी सफ़ेद रेखा होगी। 152.25 सेण्टीमीटर के किनारे वाली रेखाएं अन्त रेखाएं कहलायेगी। 274 सेण्टीमीटर के किनारे वाली रेखाएं पार्श्व (साइड) रेखाएं कहलायेगी। क्रीड़ा – तल जाल द्वारा समान माप के दो क्षेत्रों में विभाजित होगा। डबल्स खेल में टेबल की सतह 3 मिलीमीटर खड़ी सफ़ेद रेखा द्वारा दो भागों में विभाजित होती है, जो केन्द्र रेखा कहलायेगी। यह साइड रेखा के समानान्तर तथा प्रत्येक से समान दूरी पर होती है। केन्द्र रेखा सर्विस करने … Read more

हॉकी खेल की जानकारी: खेल के नियम, मैदान, खेल का समय, स्टिक

हॉकी खेल की जानकारी

हॉकी खेल की जानकारी: ” हॉकी ” शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई, इसका सही ज्ञान नहीं मिल सका है। कुछ लोगों का मानना है कि इस शब्द की उत्पत्ति फ्रांसीसी शब्द “हाके ” से हुई है, जिसका अर्थ है – गडरिये की लग्गी। इसी गडरिये की लग्गी से हॉकी के खेल का विकास हुआ। कुछ लोगों का मानना है कि आंग्ल – सेक्सन युग का ” हुक’’ शब्द  ही आगे चलकर ” हॉकी ” बना। परन्तु डण्डे और गेंद के इस खेल का नाम सबसे पहले 19वी शताब्दी में इंग्लैण्ड के स्कूली बच्चों ने दिया। इससे पहले यह खेल विभिन्न देशों में विभिन्न नामों, जैसे – हर्ली, शिण्टी, चिउका, केबुका, कोमोक , केमक , हेटकोल बेन आदि नामों से प्रचलित था। इस खेल में दो टीमें लकड़ी या कठोर धातु या फाइबर से बनी विशेष स्टिक की मदद से रबड़ या कठोर प्लास्टिक की गेंद को अपनी विरोधी टीम के नेट या गोल में डालने का प्रयत्न करती है। भारत में इसका आरम्भ 100 वर्षो से पूर्व हुआ था। हॉकी के विस्तार का श्रेय विशेषकर भारत और सुदूर पूर्व में ब्रिटेन की सेना को है। अनेक अन्तराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आहान के फलस्वरूप 1971 में विश्व कप का आरम्भ हुआ। हॉकी की अन्य मुख्य अन्तरास्ट्रीय प्रतियोगिताएं है -ओलम्पिक, एशियन कप, एशियाई खेल, यूरोपियन कप और पैन अमेरिकी खेल। आधुनिक युग में पहली बार ओलम्पिक में हॉकी 29 अक्टूबर सन 1908 में लन्दन में खेली गयी, जिसमे छह टीमें थी। 1924 में अन्तराष्ट्रीय कारणों से हॉकी ओलम्पिक में शामिल न हो सकी। … Read more

फुटबॉल के नियम, खिलाड़ियों के उपकरण और बोर्ड के निर्णय

फुटबॉल के नियम

फुटबॉल के नियम: आधुनिक फुटबॉल को इंग्लैण्ड में द फुटबॉल एसोसिएशन, अर्थात फुटबॉल संघ के गठन के साथ कुटबंध किया गया। 1863 में लॉज ऑफ दा गेंद के आधार पर ही आज फुटबॉल खेली जाती है। अन्तर्राष्ट्रीय आधार पर फुटबॉल का नियन्त्रण फेडरेशन इण्टरनेशनल डी फुटबॉल एसोसिएशन या एसोसिएशन फुटबॉल का अन्तर्राष्ट्रीय महासंघ, जिसे सक्षेप में FIFA या फीका कहा जाता है, करता है। फुटबॉल की सबसे प्रतिष्ठित अन्तर्राष्ट्रीय और लोकप्रिय प्रतियोगिता फीका विश्व कप है। इसका आयोजन प्रत्येक चौथे वर्ष किया जाता है। यह भी देखे: फुटबॉल: खेल का मैदान, खिलाड़ियों की संख्या और गेंद की जानकारी फुटबॉल के नियम बोर्ड के निर्णय   टीम में खिलाड़ियों की संख्या कितनी होगी, इसका निर्णय राष्ट्रीय एसोसिएशन करेगा। खेल आरम्भ होने से पूर्व यदि किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर किया जाता है, तो उसके स्थान पर सूची में बताये गये किसी सबस्टीट्यूट खिलाडी को ही लिया जाना चाहिए। ऐसे स्थानापन्न किये गये खिलाड़ी की प्रतीक्षा में किक – ऑफ में देरी नहीं की जानी चाहिए। ऐसे स्थानापन्न किये गए खिलाडी की प्रतीक्षा में किक – ऑफ में देरी नहीं की जानी चाहिए। जिस खिलाड़ी का स्थानापन्न किया गया हो, वह पुनः नहीं खेल सकता। यदि किसी खिलाड़ी का स्थानापन्न करना हो, तो इसकी जानकारी रेफरी को देनी चाहिए। सबस्टीट्यूट खिलाडी मैदान में तभी प्रवेश कर सकता है, जब मैच रुका हुआ हो या रेफरी उसे संकेत दे। यदि सबस्टीट्यूट खिलाड़ी किसी नियम का उल्लघंन करता है, तो उसको भी वही दण्ड दिया जायेगा, जो अन्य खिलाड़ियों को दिया जाता है; क्योकि … Read more

error: Content is protected !!